संस्कृत साहित्यम्
एतत् विषयः अति विस्तारः, अत्यन्त गहनः च यस्य वैभवम् वर्णितुम् अहमशक्तः । परन्तु अत्र कानिचन ग्रन्थानि, काव्यानि अपि स्थापितः तेषां सहृदयाः यदि पठन्ति तर्हि ते निस्सङ्कोचेन मनाह्लादं प्राप्नुवन्ति ।
अदिकाव्यं रामायणम् – वाल्मिकि विरचिता
| बालकाण्ड | १ |
| अयोध्यकाड | २ |
| अरण्यकाण्ड | ३ |
| किष्किन्धकाण्ड | ४ |
| सुन्दरकाण्ड | ५ |
| युद्धकाण्ड | ६ |
| उत्तरकांड | ७ |
पञ्चमवेदं महाभारतम् – वेदव्यास भगवता विरचिता
| आदिपर्वम् | १ |
| सभापर्वम् | २ |
| वनपर्वम् | ३ |
| विराटपर्वम् | ४ |
| उद्योगपर्वम् | ५ |
| भीष्मपर्वम् | ६ |
| द्रोणपर्वम् | ७ |
| कर्णपर्वम् | ८ |
| शल्यपर्वम् | ९ |
| सौप्तिकपर्वम् | १० |
| स्त्रीपर्वम् | ११ |
| शान्तिपर्वम् | १२ |
| अनुशासनिकपर्वम् | १३ |
| अश्वमेधपर्वम् | १४ |
| आश्र्मवासपर्वम् | १५ |
| मौसलपर्वम् | १६ |
| महाप्रस्थानिकपर्वम् | १७ |
| स्वर्गारोहणपर्वम् | १८ |
भगवद्गीता – महाभारस्य अन्तरात्मा
| भगवद्गीता | भगवद्गीता |
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